बीज मंत्र लिस्ट: नवग्रह और देवी-देवताओं के बीज मंत्र, अर्थ और जाप विधि
बीज मंत्र छोटे होते हैं, पर इन्हें मंत्रों की आत्मा कहा गया है। जानिए मुख्य बीज मंत्र और उनके देवता, नौ ग्रहों के बीज मंत्र, उनकी जाप संख्या, सही जाप विधि और वे गलतियाँ जिनसे जाप का असर कम हो जाता है।
इस लेख में
बहुत से लोग रोज़ सुबह मंत्र जपते हैं। कोई ग्रह शांति के लिए, कोई मन की शांति के लिए, तो कोई किसी मनोकामना के लिए। पर कई बार महीनों जाप के बाद भी मन में सवाल उठता है कि कुछ बदला क्यों नहीं। क्या मंत्र गलत है, या मुझसे कोई चूक हो रही है?
ज़्यादातर मामलों में मंत्र गलत नहीं होता। चूक होती है सही मंत्र चुनने में, उसके उच्चारण में, या जाप के नियम में। और इन सबकी शुरुआत होती है बीज मंत्र को समझने से।
बीज मंत्र क्या होता है
बीज का मतलब है बीज, यानी वह छोटा सा दाना जिसमें पूरा पेड़ छिपा होता है। बीज मंत्र एक या दो अक्षर के होते हैं, जैसे ह्रीं, श्रीं या क्लीं। इनका कोई सीधा शब्द-अर्थ नहीं होता, पर इन्हें किसी देवता या शक्ति की ध्वनि माना गया है।
परंपरा में कहा जाता है कि बड़े मंत्र शरीर हैं और बीज मंत्र उनकी आत्मा। इसीलिए ज़्यादातर बड़े मंत्रों के बीच में कोई न कोई बीज जुड़ा होता है।
मुख्य बीज मंत्र और उनके देवता
| बीज मंत्र | देवता या शक्ति | किस भाव से जपा जाता है |
|---|---|---|
| ॐ | परब्रह्म | सभी मंत्रों का आधार, मन की एकाग्रता |
| ऐं | सरस्वती | विद्या, वाणी और बुद्धि |
| ह्रीं | भुवनेश्वरी (शक्ति) | शक्ति, तेज और आत्मबल |
| श्रीं | लक्ष्मी | धन, समृद्धि और सौभाग्य |
| क्लीं | कृष्ण और काम शक्ति | प्रेम, आकर्षण और मधुरता |
| गं | गणेश | विघ्न दूर करना, नए काम की शुरुआत |
| दुं | दुर्गा | रक्षा और संकट से मुक्ति |
| क्रीं | काली | भय पर विजय, साहस |
| हौं | शिव | शांति, वैराग्य और कल्याण |
| हुं | रक्षा बीज | नकारात्मकता से बचाव |
नवग्रह बीज मंत्र और जाप संख्या
कुंडली में कोई ग्रह कमज़ोर या भारी हो, तो उसके बीज मंत्र का जाप परंपरा में सबसे सरल उपायों में गिना जाता है। हर ग्रह के मंत्र की एक तय जाप संख्या भी बताई गई है, जिसे सामर्थ्य के अनुसार कुछ दिनों में पूरा किया जाता है।
| ग्रह | बीज मंत्र | दिन | कुल जाप संख्या |
|---|---|---|---|
| सूर्य | ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः | रविवार | 7,000 |
| चंद्रमा | ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः | सोमवार | 11,000 |
| मंगल | ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः | मंगलवार | 10,000 |
| बुध | ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः | बुधवार | 9,000 |
| गुरु | ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः | गुरुवार | 19,000 |
| शुक्र | ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः | शुक्रवार | 16,000 |
| शनि | ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः | शनिवार | 23,000 |
| राहु | ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः | शनिवार | 18,000 |
| केतु | ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः | मंगलवार | 17,000 |
कुल जाप संख्या एक दिन में पूरी नहीं की जाती। आम तौर पर रोज़ तय संख्या में माला जपकर इसे 40 दिन या उससे अधिक समय में पूरा किया जाता है।
बीज मंत्र जाप की सही विधि
- समय: सुबह स्नान के बाद, सूर्योदय के आसपास का समय सबसे अच्छा माना जाता है। ग्रह के मंत्र के लिए उस ग्रह का दिन चुनें।
- स्थान: रोज़ एक ही साफ और शांत जगह पर बैठें।
- आसन और दिशा: ऊनी या कुश के आसन पर, पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठें।
- माला: 108 मनकों की माला लें। सामान्य जाप के लिए रुद्राक्ष की माला सबसे प्रचलित है।
- संकल्प: जाप शुरू करने से पहले मन में अपना नाम, उद्देश्य और जाप की संख्या का संकल्प लें।
- उच्चारण: हर अक्षर साफ और धीमे बोलें। बीज का अनुस्वार, जैसे ह्रीं का अंतिम नाद, पूरा गूँजना चाहिए।
- नियमितता: रोज़ एक ही समय पर, एक ही संख्या में जाप करें। बीच में छूटे नहीं।
वे गलतियाँ जिनसे जाप का असर कम हो जाता है
- किसी और की देखादेखी मंत्र चुनना: हर व्यक्ति की कुंडली अलग है। जो ग्रह आपके लिए भारी है, उसका मंत्र आपके लिए ज़रूरी है, किसी और का नहीं।
- एक साथ कई ग्रहों के मंत्र: एक समय में एक ग्रह का संकल्प लेकर उसे पूरा करना बेहतर माना जाता है।
- गलत उच्चारण: बीज मंत्र ध्वनि पर टिके होते हैं। ह्रां, ह्रीं, ह्रौं जैसे अक्षरों का अंतर बहुत मायने रखता है।
- बीच में छोड़ देना: संकल्प लेकर अधूरा छोड़ने से मन में बोझ बनता है। उतना ही संकल्प लें जितना निभा सकें।
- जल्दबाज़ी: गिनती पूरी करने की जल्दी में जाप करने से एकाग्रता नहीं बनती।
कौन सा बीज मंत्र आपके लिए है
सबसे सही बीज मंत्र वही है जो आपकी कुंडली के कमज़ोर या भारी ग्रह से जुड़ा हो। जैसे राहु भारी हो तो राहु का बीज मंत्र, और गुरु कमज़ोर हो तो गुरु का। कौन सा ग्रह भारी है, यह जानने के लिए लाल किताब के 9 ग्रह वाला लेख पढ़ें, और राहु के संकेत राहु के उपाय में देखें।
मंत्र जाप में सबसे बड़ी शक्ति श्रद्धा और नियमितता की है। छोटा सा संकल्प लीजिए, पर उसे पूरी निष्ठा से निभाइए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बीज मंत्र क्या होते हैं?
बीज मंत्र एक या दो अक्षर के मंत्र होते हैं, जैसे ह्रीं, श्रीं या क्लीं। इन्हें किसी देवता या शक्ति की ध्वनि माना गया है और बड़े मंत्रों की आत्मा कहा जाता है।
शनि का बीज मंत्र क्या है?
शनि का बीज मंत्र है: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः। इसकी कुल जाप संख्या परंपरा में 23,000 बताई गई है।
राहु का बीज मंत्र क्या है?
राहु का बीज मंत्र है: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः। इसकी कुल जाप संख्या 18,000 बताई गई है।
बीज मंत्र का जाप कितनी बार करना चाहिए?
रोज़ कम से कम एक माला यानी 108 बार जाप करना अच्छा माना जाता है। ग्रह शांति के लिए उस ग्रह की कुल जाप संख्या कई दिनों में पूरी की जाती है।
क्या बीज मंत्र का जाप बिना गुरु के कर सकते हैं?
नवग्रह बीज मंत्र और ॐ, गं, श्रीं जैसे सरल बीज मंत्र आम तौर पर श्रद्धा से कोई भी जप सकता है। किसी विशेष साधना के लिए जानकार गुरु से मार्गदर्शन लेना बेहतर है।
लक्ष्मी का बीज मंत्र कौन सा है?
लक्ष्मी का बीज मंत्र श्रीं है। इसे धन, समृद्धि और सौभाग्य के भाव से जपा जाता है।