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लाल किताब के 9 ग्रह: पक्के घर, रंग, दिन, समय और शत्रु ग्रह (पूरी तालिका)

lalkitabgyan.com डेस्क·31 अक्टूबर 2026·5 मिनट

हर ग्रह का अपना पक्का घर, रंग, दिन, समय और शत्रु होता है। कुंडली पढ़ने और सही उपाय चुनने की नींव यही पाँच सूत्र हैं। पूरी तालिका के साथ आसान भाषा में समझिए।

इस लेख में
  1. मूल नियम: बारह घर, नौ ग्रह
  2. ग्रहों के पक्के घर
  3. ग्रहों के रंग
  4. ग्रहों के दिन और दिन का समय
  5. नर, स्त्री और पापी ग्रह
  6. शत्रु ग्रहों की कड़ी
  7. सही उपाय कैसे चुना जाता है
  8. निष्कर्ष

क्या कभी ऐसा हुआ है कि किसी के बताए उपाय को आपने पूरे मन से 40 दिन किया, फिर भी कुछ नहीं बदला? अक्सर इसकी वजह उपाय नहीं, बल्कि गलत ग्रह, गलत दिन या गलत समय होता है। जैसे बिना नाड़ी देखे दवा देना ठीक नहीं, वैसे ही बिना ग्रहों के मूल सूत्र समझे उपाय करना अधूरा है।

लाल किताब का पूरा पहला भाग इन्हीं सूत्रों पर टिका है: कौन सा ग्रह किस घर का पक्का मालिक है, उसका रंग क्या है, दिन कौन सा है और उसका शत्रु कौन है। इन्हें समझ लिया, तो आप खुद पहचान पाएँगे कि आपके लिए कौन सा उपाय सही है। आइए एक-एक करके समझें।

मूल नियम: बारह घर, नौ ग्रह

कुंडली के बारह घरों का क्रम और नंबर हमेशा के लिए तय है। नौ ग्रह इन्हीं बारह घरों में अपनी जगह लेते हैं। जो घर खाली रह जाते हैं, उन पर गुरु का असर माना गया है, क्योंकि खाली जगह हवा से भरी होती है, और हवा गुरु की है।

यानी कुंडली का कोई भी घर बेकार नहीं होता। खाली घर का भी अपना फल है।

ग्रहों के पक्के घर

हर घर का एक पक्का मालिक ग्रह है। कोई ग्रह किसी घर में बैठा हो, तो उसका फल समझने के लिए यह देखना ज़रूरी है कि उस घर का असली मालिक कौन है।

घर पक्का मालिक ग्रह
1 सूर्य
2 गुरु
3 मंगल
4 चंद्रमा
5 गुरु
6 केतु
7 शुक्र और बुध
8 मंगल और शनि
9 गुरु
10 शनि
11 गुरु
12 राहु

गौर कीजिए, सबसे ज़्यादा घर गुरु के हैं। इसीलिए गुरु को जगत का गुरु और हवा का स्वामी कहा गया है।

राहु और केतु को अलग से अपना घर नहीं मिला। इन्हें लहरों का मालिक कहा गया है: एक इंसान को सिर से पकड़ता है और दूसरा पैरों से। केतु बुध के साथ छठे घर में और राहु गुरु के साथ बारहवें घर में अपनी जगह पाते हैं।

पक्के घर से क्या पता चलता है

जब कोई ग्रह अपने ही पक्के घर में बैठा हो, तो उसका असर मज़बूत और काफी हद तक तय होता है। ऐसे ग्रह का फल उपाय से बहुत नहीं बदलता। उपाय का असली काम उन ग्रहों पर होता है जो अपनी जगह से हटकर बैठे हैं।

ग्रहों के रंग

हर ग्रह का अपना रंग है, और उपाय में इन्हीं रंगों की चीज़ें काम आती हैं:

ग्रह रंग
गुरु पीला
सूर्य तांबे जैसा चमकीला
चंद्रमा दूधिया सफेद
शुक्र दही जैसा सफेद
मंगल (शुभ) खून जैसा लाल
मंगल (अशुभ) जंग लगा लाल
बुध हरा
शनि काला
राहु नीला
केतु सफेद-काला मिला हुआ, बिल्ली की आँख जैसा

इसीलिए गुरु के उपाय में पीली चीज़ें, चंद्रमा में चांदी और दूध, और शनि में काली चीज़ें बताई जाती हैं।

ग्रहों के दिन और दिन का समय

हर ग्रह का एक दिन है, और दिन के अलग-अलग हिस्सों पर अलग ग्रह का राज चलता है। उपाय का समय चुनते समय यह बहुत काम आता है।

ग्रह दिन दिन का समय
गुरु गुरुवार सूर्योदय से सुबह 8 बजे तक
सूर्य रविवार सुबह 8 से 10 बजे
चंद्रमा सोमवार सुबह 10 से 11 बजे, और चाँदनी रात
मंगल मंगलवार सुबह 11 से दोपहर 1 बजे
शुक्र शुक्रवार दोपहर 1 से 4 बजे
बुध बुधवार शाम 4 से 6 बजे
राहु गुरुवार की शाम सूर्यास्त से तारे निकलने तक
शनि शनिवार तारे निकलने के बाद की रात
केतु रविवार की सुबह सूर्योदय से पहले के लगभग 2 घंटे

जैसे, गुरु का उपाय गुरुवार की सुबह जल्दी करना शुभ है, और शुक्र का उपाय शुक्रवार की दोपहर।

नर, स्त्री और पापी ग्रह

ग्रहों को उनके स्वभाव से भी बाँटा गया है:

  • नर ग्रह: गुरु, सूर्य और मंगल
  • स्त्री ग्रह: शुक्र (धन और पत्नी) और चंद्रमा (माता)
  • नपुंसक ग्रह: बुध
  • पापी ग्रह: राहु, केतु और शनि। इनमें राहु और केतु असली पापी हैं, और इनमें से कोई भी शनि के साथ मिल जाए तो शनि भी पापी हो जाता है।

मंगल के लिए एक सुंदर सूत्र है: शुभ मंगल शहद जैसा है और अशुभ मंगल ज़हर जैसा।

शत्रु ग्रहों की कड़ी

ग्रहों की दुश्मनी एक कड़ी की तरह चलती है:

  • सूर्य शनि का शत्रु है
  • शुक्र सूर्य का
  • गुरु शुक्र का
  • बुध गुरु का
  • चंद्रमा बुध का
  • केतु चंद्रमा का
  • अशुभ मंगल केतु का
  • और राहु सबका शत्रु है

कुंडली में जब दो शत्रु ग्रह साथ बैठें या एक-दूसरे को देखें, तो उनके टकराव का असर अलग से देखा जाता है।

सही उपाय कैसे चुना जाता है

यही वह जगह है जहाँ ज़्यादातर लोग चूक जाते हैं। कोई भी उपाय चार सवालों के जवाब पर टिका होता है:

  1. कौन सा ग्रह भारी है?
  2. वह किस घर में बैठा है, और उस घर का पक्का मालिक कौन है?
  3. उस ग्रह का रंग, दिन और समय क्या है?
  4. उसका शत्रु ग्रह कहाँ बैठा है?

इन चारों को मिलाकर ही सही उपाय, सही दिन और सही समय तय होता है। इसीलिए किसी और की कुंडली का उपाय अपने ऊपर आज़माने से लाभ कम और उलझन ज़्यादा होती है।

निष्कर्ष

पक्के घर, रंग, दिन, समय और शत्रु ग्रह, ये पाँच सूत्र इस विद्या की नींव हैं। इन्हें समझ लिया, तो किसी भी उपाय के पीछे की वजह आप खुद समझ पाएँगे। किसी खास ग्रह के उपाय पढ़ने हों तो राहु के उपाय देखें, और इस पद्धति की पूरी कहानी लाल किताब क्या है में पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पहले घर का पक्का मालिक कौन है?

पहले घर का पक्का मालिक सूर्य है।

गुरु के पक्के घर कौन से हैं?

घर नंबर 2, 5, 9 और 11 गुरु के पक्के घर हैं, और बारहवें घर में गुरु राहु के साथ अपनी जगह पाता है।

राहु और केतु का पक्का घर कौन सा है?

राहु और केतु को अलग से अपना घर नहीं मिला। केतु बुध के साथ छठे घर में और राहु गुरु के साथ बारहवें घर में अपनी जगह पाते हैं।

कुंडली के खाली घर का फल कैसे देखा जाता है?

खाली घर पर गुरु का असर माना जाता है, क्योंकि खाली जगह हवा से भरी होती है और हवा गुरु की है।

गुरु का उपाय किस समय करना चाहिए?

गुरु का दिन गुरुवार है, और सूर्योदय से सुबह 8 बजे तक का समय गुरु का माना जाता है।

सबसे बड़े पापी ग्रह कौन से हैं?

राहु, केतु और शनि पापी ग्रह हैं, और इनमें राहु और केतु असली पापी माने गए हैं।