लाल किताब क्या है (Lal Kitab in Hindi): इतिहास, खास बातें और उपाय के नियम
लाल किताब ज्योतिष की वह पद्धति है जो अपने सरल और घरेलू उपायों के लिए जानी जाती है। जानिए इसके पाँच संस्करण, इसकी खास सोच, पक्के घर, ग्रहों से जुड़ी चीज़ें और उपाय करने के ज़रूरी नियम।
इस लेख में
शायद आपने भी घर के किसी बड़े-बुज़ुर्ग को कहते सुना हो कि बहते पानी में कुछ प्रवाहित कर दो, या चांदी का टुकड़ा पास रखो। ऐसे बहुत से घरेलू उपाय जिन्हें हम बचपन से सुनते आए हैं, उनकी जड़ एक ही किताब में मिलती है: लाल किताब।
बहुत लोग इसके उपाय तो कर लेते हैं, पर यह नहीं जानते कि यह किताब कहाँ से आई, इसकी सोच बाकी ज्योतिष से अलग कैसे है, और उपाय करते समय कौन सी गलतियाँ सबसे ज़्यादा होती हैं। इसी वजह से कई बार पूरे मन से किया गया उपाय भी असर नहीं दिखाता। इस लेख में यही सब आसान भाषा में समझिए।
लाल किताब क्या है
लाल किताब ज्योतिष और हस्त रेखा को मिलाकर बनी एक पद्धति है। इसकी मूल किताबें उर्दू में लिखी गई थीं और इनकी जिल्द लाल रंग की थी, इसलिए यह नाम आम लोगों में प्रचलित हो गया। आम तौर पर माना जाता है कि इसके लेखक पंडित रूप चंद जोशी थे, जो अविभाजित पंजाब के रहने वाले थे।
इस पद्धति की सबसे बड़ी पहचान है कि यह मुश्किल पूजा-पाठ या महंगे अनुष्ठान के बजाय रोज़मर्रा की आसान चीज़ों से जुड़े उपाय बताती है।
लाल किताब के पाँच संस्करण
लाल किताब एक ही बार में नहीं लिखी गई। इसके पाँच हिस्से अलग-अलग सालों में छपे माने जाते हैं:
| साल | नाम | खास बात |
|---|---|---|
| 1939 | लाल किताब के फरमान | पहला संस्करण, जो अधूरा माना गया |
| 1940 | लाल किताब के अरमान | पहले संस्करण का पूरक |
| 1941 | लाल किताब (तीसरा भाग) | लाल किताब गुटका के नाम से मशहूर |
| 1942 | लाल किताब के फरमान | नया और बड़ा संस्करण |
| 1952 | लाल किताब | पिछले सभी हिस्सों को मिलाकर बना अंतिम संस्करण |
आज बाज़ार में लाल किताब के नाम से जो ज़्यादातर किताबें मिलती हैं, वे इन्हीं संस्करणों पर आधारित व्याख्याएँ या अनुवाद हैं। 1952 वाले संस्करण को सबसे पूरा माना जाता है।
लाल किताब बाकी ज्योतिष से कैसे अलग है
1. हस्त रेखा और कुंडली साथ-साथ
लाल किताब में हाथ की रेखाओं और हथेली के पर्वतों को भी कुंडली से जोड़ा गया है। इसकी परंपरा में यह तक बताया गया है कि जन्म का सही समय पता न हो, तो हाथ देखकर कुंडली बनाने की कोशिश की जा सकती है।
2. पक्के घर की सोच
लाल किताब में हर ग्रह का एक या ज़्यादा पक्का घर माना गया है, यानी कुंडली का वह घर जो उस ग्रह का स्थायी ठिकाना है। कोई ग्रह किस घर में बैठा है और उस घर का पक्का मालिक कौन है, इन दोनों को मिलाकर फल देखा जाता है।
3. हर ग्रह से जुड़ी चीज़ें और रिश्ते
इस पद्धति में दुनिया की हर चीज़, रिश्ते और काम को नौ ग्रहों में बाँटा गया है। जैसे:
- सूर्य: तांबा, पिता, सरकार
- चंद्रमा: चांदी, पानी, माँ
- गुरु: सोना, पीली चीज़ें, बड़े-बुज़ुर्ग
- शुक्र: मिट्टी, पत्नी, गाय
- शनि: लोहा, तेल, मज़दूर वर्ग
इसी वजह से लाल किताब के उपाय ग्रह से जुड़ी चीज़ों के इर्द-गिर्द होते हैं। किसी ग्रह का असर भारी हो, तो उससे जुड़ी चीज़ों के साथ सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
4. ऋण की अवधारणा
लाल किताब में पितृ ऋण, मातृ ऋण जैसे कई तरह के ऋण बताए गए हैं। माना जाता है कि पिछली पीढ़ियों के कुछ कर्मों का असर कुंडली में खास संकेतों के रूप में दिखता है, और इसके लिए परिवार के सब लोग मिलकर उपाय करते हैं।
5. वर्षफल
लाल किताब में हर साल का अलग चार्ट यानी वर्षफल बनाया जाता है। इससे देखा जाता है कि उस साल कौन सा ग्रह किस घर में असर करेगा, और उसी हिसाब से उस साल के उपाय चुने जाते हैं।
क्या हर ग्रह का असर उपाय से बदला जा सकता है
यह लाल किताब की एक बहुत ज़रूरी बात है, जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। इस पद्धति के अनुसार जो ग्रह अपने पक्के घर, अपनी राशि, या ऊँच या नीच के घर में हो, उसका असर काफी हद तक तय माना जाता है। उपाय मुख्य रूप से उन ग्रहों के लिए होते हैं जिनकी स्थिति ऐसी नहीं है, जिन्हें लाल किताब संदेह वाला ग्रह कहती है।
यानी लाल किताब यह नहीं कहती कि किसी भी ग्रह को मनचाहे घर में बिठाया जा सकता है। यह सोच-समझकर और सही ग्रह के लिए उपाय करने पर ज़ोर देती है।
लाल किताब के उपाय करने के ज़रूरी नियम
परंपरा में लाल किताब के उपायों के साथ कुछ नियम भी जुड़े हैं:
- दिन में करें: उपाय सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच करना बेहतर माना जाता है।
- लगातार करें: ज़्यादातर उपाय 40 से 43 दिन तक लगातार किए जाते हैं। बीच में छूट जाए तो दोबारा शुरू करें।
- एक समय में एक उपाय: कई उपाय एक साथ शुरू न करें।
- खुद करें: जिसकी कुंडली है, उपाय वही करे। खून के रिश्ते वाले परिवार के सदस्य कुछ खास उपायों में मदद कर सकते हैं।
- श्रद्धा और नीयत: उपाय को बोझ समझकर नहीं, साफ मन से करें।
- किसी को नुकसान नहीं: ऐसा कोई काम न करें जिससे किसी इंसान, जीव या प्रकृति को नुकसान हो।
लाल किताब पढ़ते समय सावधानी
लाल किताब लगभग सत्तर-अस्सी साल पहले लिखी गई थी। इसके कई उदाहरण उस समय के समाज और रहन-सहन पर आधारित हैं। इसलिए आज इसकी बातों को समझते समय व्यक्ति के देश, समय और हालात का ध्यान रखना ज़रूरी है।
बाज़ार में लाल किताब के नाम से कई तरह की बातें फैली हैं, जिनमें से कुछ का मूल किताब से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए किसी भी उपाय को आँख मूँदकर न अपनाएँ। सेहत, पैसे या कानून से जुड़े फैसलों में हमेशा डॉक्टर, विशेषज्ञ या वकील की सलाह भी लें।
आगे क्या पढ़ें
किसी खास ग्रह की परेशानी हो तो राहु के उपाय पढ़ें, घर में पीढ़ियों से एक जैसी रुकावट हो तो पितृ दोष के उपाय देखें, और ग्रहों के मूल सूत्र लाल किताब के 9 ग्रह में समझें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लाल किताब किसने लिखी थी?
आम तौर पर माना जाता है कि लाल किताब के लेखक पंडित रूप चंद जोशी थे, जो अविभाजित पंजाब के रहने वाले थे। इसकी मूल किताबें उर्दू में लिखी गई थीं।
लाल किताब के कितने संस्करण हैं?
लाल किताब के पाँच संस्करण माने जाते हैं, जो 1939, 1940, 1941, 1942 और 1952 में छपे। 1952 वाला संस्करण सबसे पूरा माना जाता है।
लाल किताब का नाम लाल किताब क्यों पड़ा?
इसकी मूल किताबों की जिल्द लाल रंग की थी, इसलिए यह नाम आम लोगों में प्रचलित हो गया।
लाल किताब के उपाय कितने दिन करने चाहिए?
परंपरा में ज़्यादातर उपाय 40 से 43 दिन तक लगातार किए जाते हैं, और दिन के समय करना बेहतर माना जाता है।
क्या लाल किताब से हर ग्रह का असर बदल सकता है?
नहीं। लाल किताब के अनुसार जो ग्रह अपने पक्के घर, अपनी राशि या ऊँच-नीच के घर में हो, उसका असर काफी हद तक तय माना जाता है। उपाय मुख्य रूप से संदेह वाले ग्रहों के लिए होते हैं।
क्या लाल किताब वैदिक ज्योतिष से अलग है?
लाल किताब के उपाय और कुंडली पढ़ने का तरीका अलग है, लेकिन इसमें भी वही नौ ग्रह और बारह घर हैं। इसे भारतीय ज्योतिष की ही एक अलग पद्धति के रूप में देखा जाता है।